
रफ्तार का कहर – पलक झपकते ही दो मौसेरे भाइयों को लील गया पहिया।
पुरवा संवाददाता
उन्नाव।मंगलवार को पुरवा – अचलगंज मार्ग पर गोकुलपुर के निकट डम्फर की चपेट में आए दो मौसेरे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई।दोनों बाइक से पुरवा पीलिया की दवा लेने जा रहे थे।घटना सबेरे आठ बजे की है।बाद खबर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पीएम हेतु भेज दिया।डम्फर पुलिस के कब्जे में है चालक परिचालक दोनों फरार हैं ।
अचलगंज थाना क्षेत्र के ग्राम बेहटानथई निवासी 22 वर्षीय अभय प्रताप सिंह और 12 वर्षीय सूर्यांश दोनों मौसेरे भाई थे। दोनों पासाखेड़ा में अपने नाना कमलेश सिंह के घर पर रह रहे थे आज सबेरे बाइक से पुरवा कस्बे के मोहल्ला दली गड़ी में पीलिया की दवा लेने जा रहे थे। गोकुलपुर मोड़ के पास विपरीत दिशा से आ रहे डम्फर ने टक्कर मार दी नतीजा दोनों की मौके पर ही मौत हो गई मौरंग से लदे ट्रक को चालक छोड़ कर भाग गया।प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो टक्कर लगते ही दोनों सड़क पर गिरे पड़े और डम्फर उन्हें रौंदता हुआ निकल गया।
बाद घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, सूचना पाते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई क्षेत्राधिकारी अरविंद चौरसिया कोतवाली प्रभारी भवन सिंह मौर्य ने मृतकों के परिजनों को हादसे की सूचना दी शवों को कब्जे में लेकर पीएम हेतु भेज दिया।
नाती अभय सिंह की मौत से नाना कमलेश सिंह नानी पुष्पा पत्नी सिखा पुत्र आरव व सूर्यांश की मां शिखा सिंह पिता सुदीप का रो रो का बुरा हाल है मृतक परिजनों की चीत्कार से पत्थर दिल भी रो पड़े घटना के संबंध में बताते हुए प्रभारी निरीक्षक भवन सिंह ने बताया कि आरोपी ट्रक चालक और खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है विधिक कार्रवाई की जा रही है।
——– ननिहाल में ही रहते थे अभय और सूर्यांश।
माँ की मौत के बाद से ही मृतक अभय अपने नाना कमलेश सिंह के यहां रहता था।बताया गया है कि अभय की मां तीन बहन थी उसकी मौसी मृतक 12 वर्षीय सूर्यांश की मां भी अपने पिता के साथ रहती थी कोई भाई ना होने के कारण माता पिता की देखभाल करती थी l
—— मासूम आरव को नहीं पता उसके पिता उसे अब नहीं मिलेंगे।
मृतक अभय का विवाह दो साल पहले अब का पत्नी शिखा के साथ हुआ था दोनों के मध्य 6 माह का नौनिहाल आरव है अचानक हुई घटना ने दो जिन्दगी का भविष्य अंधकार मय कर दिया।मासूम आरव को नहीं पता अब उसके पिता उसे कभी नहीं मिलेंगे दिल दहला देने वाली घटना से जो भी रूबरू हुआ उसी के आंसू बह निकले आखिर न जाने विधाता को क्या मंजूर है।


















