
बाल भक्त ध्रुव की भक्ति और दृढ़ निश्चय की भाव पूर्ण कथा सुन भक्त हुए भाव विभोर
बांगरमऊ, संवाददाता

बांगरमऊ उन्नाव
क्षेत्र के ग्राम भिखारीपुर पतसिया में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस श्रीधाम वृंदावन से पधारे आचार्य पंडित देवकीनंदन पांडेय जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्त ध्रुव कथा श्रवण कराई। उन्होंने कहा कि भागवत पुराण में वर्णित राजा उत्तानपाद और उनके पुत्र ध्रुव की कथा दृढ़ निश्चय ,भक्ति और क्षमा का अनुपम उदाहरण है। आचार्य जी ने कथानक का वर्णन करते हुए कहा कि भक्त ध्रुव ने अपनी सौतेली मां के सौतेले व्यवहार से व्यथित होकर छोटी उम्र में भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का दृढ़ संकल्प कर लिया और वन में एक पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या करने लगे ।तपस्या के समय भक्त ध्रुव ने फल, फूल ,पत्ती का आहार किया।बाद में केवल हवा का आहार करने लगे। वायुमंडल में हवा रुकने से चारों तरफ हाहाकार मच गई।भक्त ध्रुव की कठोर तपस्या से तीनों लोकों में त्राहि त्राहि होने लगी। स्वर्ग के देवता घबराकर भगवान विष्णु के क्षीर सागर में त्राहि त्राहि माम कर प्रार्थना करने लगे। देवताओं की पुकार पर भगवान विष्णु भक्त ध्रुव की कठोर तपस्या को देखकर भगवान ने भक्त ध्रुव को साक्षात् रूप से चतुर्भुज रूप में दर्शन देकर वरदान दिया।

कथा व्यास ने कहा कि संसार में भक्त ध्रुव से छोटा कम उम्र का भक्त पैदा नहीं हुआ। उन्होंने उपदेश दिया कि सच्ची भक्ति और दृढ़ निश्चय से ईश्वर को भी पाया जा सकता है। कथा की व्यवस्था सुघर सिंह , अखिलेश सिंह,पवन सिंह ,देवेंद्र प्रताप सिंह, संतोष कुमार सिंह, ठाकुर प्रसाद, अवधेश यादव,अशोक सिंह, पिंकू शुक्ला ,सुनील सिंह, राम बहादुर सिंह ,सुमित सिंह ,अनुराग सिंह, श्री राम सिंह ,गजेंद्र सिंह , बबोल सेंगर,अहमद हुसैन , सुरेंद्र , मुकेश व रंजीत आदि भक्तों ने सम्हाली।


















