
मोहर्रम का चांद देखते ही मजलिस ,मातम जुलूसों का दौर शुरू
उन्नाव।
मोहर्रम का चांद देखते ही अज़ाखानो, इमामबारगाहो में फर्शऐ अजा बिछाकर,ताजिए, अलम रख कर मजलिस मातम का दौर शुरू हो गया है। ये जानकारी देते हुए अंजुमन हैदरिया _ अब्बासिया कस्बा न्योतनी के मीडिया प्रभारी मुर्तजा हैदर रिज़वी ने बताया कि शहर उन्नाव, कस्बों, तहसीलों ,ग्रामीण क्षेत्रों के दूर दराज़ के ग्रामीण अंचलों में हज़रत इमाम हुसैन ,अ. स.कर्बला के शहीदो की याद में सुबह से लेकर देर रात तक मजलिस मातम इमामबाड़ों में बरपा हो रही है। 
मुर्तजा ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन (अ. स.) और उनके परिवार के , साथियों ने करबला के मैदान में जलती हुई रेत पर सच्चाई हक़ मानवता ,,इंसानियत की हिफाजत के लिए शहीद कर दिए गए थे हजरत इमाम हुसैन का मुकाबला एक ज़ालिम बादशाह यज़ीद से हुआ था यजीद एक झूठा, शराबी क्रूर जालिम इंसान था यजीद हिंसा, और असत्य पर पुर्ण विश्वास रखता था हजरत इमाम हुसैन ने सत्य के रास्ते पर चलते हुए विजय हासिल की थी आज से लगभग 1400 साल पहले करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन ने मानवता, इंसानियत सत्य , के रास्ते पर चलते हुए विजय प्राप्त की थी और कर्बला की दहकती हुई जमीन पर सच्चाई, हक़ मानवता की हिफाजत के अपनी और अपने घर वालों की कुर्बानी दे कर शहीद हो गये थे ये कुर्बानी आज तक कायम ज़िन्दा है।
इमाम हुसैन की कुरबानी ने ये साबित कर दिया कि असत्य कितनी ही ताकतवर हो अंत में जीत सत्य की होती है हज़रत इमाम हुसैन की कुरबानी इसी पैग़ाम करबला ने हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को भी प्रभावित्त किया जिन्होंने अहिंसा का रूप लेकर अपने भारत देश को आजाद कराया था गम (शोक) का महीना मोहर्रम के मौके पर इमाम हुसैन की याद में शहर उन्नाव में, कस्बों, तहसीलों, ग्रामीण क्षेत्रों में, मजलिसो, मातम, जुलूसों का आयोजन करके सुबह से लेकर देर तक जारी रहता है जिसमें इमाम हुसैन के बलिदान को याद करके श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।



















