
मानव को काम क्रोध मद मोह रूपी अहंकारो से दूर रहना चाहिए इन विकारों के रहते परमात्मा का सानिध्य सम्भव नहीं
राकेश चौरसिया संवाददाता
बांगरमऊ उन्नाव।
श्रीमद् भागवत परिवार सेवा प्रकल्प के तत्वावधान में नगर के स्टेशन रोड चौराहा स्थित सुरेंद्र प्रधान के हाता में आयोजित श्री राम कथा के तृतीय दिवस मानस मर्मज्ञ ओम जी मिश्रा ने नारद मोह कथा श्रवण कराकर श्रद्धालु भक्तों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने उपदेश दिया कि इस देह सहित सभी साधन नाशवान हैं। इसलिए मानव को अपने पद, प्रतिष्ठा, धन व वैभव का कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए।
विख्यात संत स्वामी रामस्वरूप ब्रम्हचारी की अध्यक्षता में षष्ठम पुरुषोत्तम मास अंतर्गत आयोजित श्री राम कथा अंतर्गत आचार्य ओम जी मिश्रा ने नारद मोह के कथानक का वर्णन करते हुए बताया कि ऋषि नारद को अहंकार हो गया था कि वह विष्णु भगवान के सबसे बड़े उपासक हैं। यह देखकर भगवान विष्णु ने ऋषि नारद के कल्याण हेतु अभूतपूर्व सुंदर कन्या के रूप में मां लक्ष्मी के स्वयंवर की रचना की। भगवान विष्णु ने नारद के रूप को विकृत कर दिया। जिससे लक्ष्मी ने वरमाला नारायण के गले में डाल दी। तब नारद का मोह भंग हुआ। आचार्य जी ने कहा कि मानव के काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार यह पांच महा शत्रु हैं। इन पांचों विकारों पर विजय पाने से ही परमपिता परमात्मा का सानिध्य प्राप्त हो पाना संभव है। इसके पूर्व आचार्य जी ने शंकर – पार्वती के विवाह की सरस कथा का वर्णन कर श्रोता भक्तों को भक्ति रस में डुबो दिया।




















