
*उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार में उन्नाव की उपेक्षा से जनपद वासियों में मायूसी, ‘ठगा’ महसूस कर रहे हैं लोग*—
उन्नाव।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले और ‘कलम और तलवार’ की धरती के रूप में विख्यात उन्नाव जनपद को प्रदेश के वर्तमान मंत्रिमंडल विस्तार में जगह न मिलने से स्थानीय लोगों और राजनीतिक गलियारों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। जनपद वासियों का कहना है कि हर चुनाव में बढ़-चढ़कर सत्ता पक्ष का साथ देने के बावजूद, कैबिनेट में प्रतिनिधित्व न मिलना उनके साथ अन्याय है।
मंत्रिमंडल विस्तार के बीच उन्नाव के लोगों को उम्मीद थी कि इस बार जिले के किसी न किसी विधायक को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। लेकिन सूची में जनपद का नाम गायब होने से समर्थकों के साथ-साथ आम जनता में भी मायूसी छा गई है। सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक, हर जगह बस एक ही चर्चा है कि आखिर उन्नाव की अनदेखी क्यों की गई? स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं का कहना है कि उन्नाव ने हमेशा से प्रदेश की राजनीति को दिशा दी है। जिले की सभी विधानसभा सीटों पर सत्तारूढ़ दल का दबदबा होने के बाद भी नेतृत्व द्वारा किसी चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल न करना समझ से परे है। एक स्थानीय निवासी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें उम्मीद थी कि जिले के विकास को गति देने के लिए यहां से कम से कम एक राज्यमंत्री तो बनाया ही जाएगा, लेकिन अब हम खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में जिले का कोई प्रतिनिधि न होने से क्षेत्रीय समस्याओं को शासन स्तर पर पुरजोर तरीके से उठाना मुश्किल हो सकता है। जिले की बड़ी परियोजनाओं, औद्योगिक विकास और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भले ही सत्ता पक्ष के विधायक इस मामले पर खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन उनके समर्थकों के चेहरे की मायूसी सब कुछ बयां कर रही है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार पर तंज कसना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार ने उन्नाव की जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ किया है। अब देखना यह होगा कि आगामी समय में क्या सरकार किसी अन्य रूप में उन्नाव को राजनीतिक सौगात देकर इस नाराजगी को दूर कर पाती है या नहीं।



















