
यूपी में पेंशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव, शीतकालीन सत्र में पेश होगा नया बिल
रिपोर्ट – RPS समाचार
लखनऊ
उत्तर प्रदेश में पेंशन पात्रता को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों और कानूनी उलझनों को समाप्त करने के लिए योगी सरकार अब निर्णायक कदम उठाने जा रही है। विधानमंडल के आगामी शीतकालीन सत्र में सरकार “उत्तर प्रदेश पेंशन की हकदारी तथा विधिमान्यकरण अध्यादेश–2025” को एक विधेयक के रूप में पेश करेगी। सदन की मंजूरी के बाद यह अध्यादेश स्थायी कानून का रूप ले लेगा। यह कदम राज्य में पेंशन व्यवस्था को स्पष्ट, पारदर्शी और नियमबद्ध बनाने की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
नियमावली के अनुरूप नियुक्त कर्मचारियों को ही पेंशन
नई व्यवस्था के अनुसार, केवल वही कर्मचारी राज्य पेंशन के दावेदार होंगे जिनकी नियुक्ति नियमावली के अनुसार किसी स्वीकृत एवं स्थायी पद पर हुई है। यह स्पष्ट किया गया है कि—
दैनिक वेतनभोगी,संविदा कर्मचारी,तथा वे कर्मचारी जो सीपीएफ या ईपीएफ के सदस्य रहते हुए भी स्थायी पद पर नियुक्त नहीं हैं,
वे अब पेंशन का दावा नहीं कर सकेंगे।
सरकार का कहना है कि पेंशन व्यवस्था का मूल उद्देश्य केवल नियमित और नियमावली के तहत नियुक्त कर्मचारियों को भविष्य में सुरक्षित आय प्रदान करना है। ऐसे में अन्य श्रेणियों में सेवा देने वाले कर्मियों के पेंशन दावों का कोई विधिक आधार नहीं बनता।
1 अप्रैल 1961 से प्रभावी रहेगा नियम
अध्यादेश में यह भी उल्लेख है कि पेंशन पात्रता संबंधित यह व्यवस्था 1 अप्रैल 1961 से प्रभावी मानी जाएगी। इसका मतलब है कि पिछले वर्षों में हुए ऐसे तमाम मामले, जिनमें बिना नियमावली में निर्धारित प्रक्रिया के नियुक्ति पाई व्यक्तियों ने पेंशन का दावा किया है, वह स्वतः अस्वीकृत की श्रेणी में आ जाएंगे।
क्यों लाना पड़ा यह अध्यादेश?
पिछले कई वर्षों में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां—
भर्ती प्रक्रिया अधूरी रहते हुए भी कर्मचारी सेवा करते रहे,
कुछ लोगों को तदर्थ या अनियमित रूप से नियुक्त किया गया,
और सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पेंशन का दावा ठोक दिया।
इनमें बड़ी संख्या में मामले न्यायालयों में लंबित हैं, जिससे न केवल प्रशासनिक जटिलता पैदा हो रही थी बल्कि राजकोष पर भी अतिरिक्त भार पड़ सकता था। इस स्थिति को नियंत्रित करने और व्यवस्था को कानूनी मजबूती देने के लिए सरकार ने अगस्त 2025 में इस अध्यादेश को कैबिनेट मंजूरी दी थी तथा सितंबर में इसे लागू कर दिया गया था। अब इसे विधेयक के रूप में सदन में प्रस्तुत किया जा रहा है।
औद्योगिक निवेश को बढ़ावा: तीन कंपनियों को मिलेगी प्रोत्साहन राशि
राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए योगी सरकार ने आज हुई कैबिनेट बैठक में तीन कंपनियों को प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया। इससे पूर्व मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने इन कंपनियों को प्रोत्साहन अनुमोदित किया था।
राशि प्राप्त करने वाली कंपनियाँ
1. मेसर्स पसवारा पेपर्स लिमिटेड, मेरठ
– विस्तारीकरण के लिए स्वीकृत राशि: ₹1,50,15,711
2. मेसर्स केआर पल्प एंड पेपर्स लिमिटेड, शाहजहांपुर
– स्वीकृत राशि: ₹56,39,785
3. मेसर्स बृंदावन एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड
– उत्पादन इकाई विस्तार के लिए स्वीकृत राशि: ₹17,06,26,256
सरकार का दावा है कि इन कंपनियों को दी जा रही प्रोत्साहन राशि से निवेश बढ़ेगा, औद्योगिक इकाइयों का विस्तार होगा और स्थानीय स्तर पर नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। उत्तर प्रदेश सरकार पूर्व से ही ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ और औद्योगिक नीतियों के माध्यम से राज्य को निवेश हब के रूप में विकसित करने के प्रयास में जुटी है।





















