
होली में उपलों का विशेष महत्व, प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ने बताया आध्यात्मिक रहस्य
उन्नाव।
होली पर्व को लेकर जहां एक ओर बाजारों में रंग, गुलाल और पिचकारियों की धूम है, वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन में उपयोग किए जाने वाले उपलों (गोबर के कंडों) का विशेष महत्व माना गया है। इस संबंध में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य रघुनाथ प्रसाद शास्त्री ने होली में उपलों की धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक महत्ता पर प्रकाश डाला।
शास्त्री जी ने बताया कि होलिका दहन में गोबर के उपलों का प्रयोग केवल परंपरा नहीं, बल्कि शुद्धिकरण की एक वैदिक प्रक्रिया है। गोबर को हिंदू धर्म में पवित्र माना गया है और इससे निर्मित उपले वातावरण को शुद्ध करने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में जब होलिका दहन होता है, तब उपलों की अग्नि से निकलने वाली ऊर्जा नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार होलिका दहन की अग्नि में उपलों के साथ गेहूं की बालियां, नई फसल और नारियल अर्पित करने से ग्रहदोषों की शांति होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु या शनि से संबंधित दोष होते हैं, उन्हें होलिका दहन के समय परिक्रमा कर उपलों की आहुति अवश्य देनी चाहिए।
शास्त्री जी ने यह भी बताया कि गोबर के उपलों में प्राकृतिक औषधीय गुण होते हैं। जब ये जलते हैं तो वातावरण में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं का नाश करते हैं, जिससे मौसमी रोगों से बचाव होता है। यह परंपरा हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा प्रकृति संरक्षण और स्वास्थ्य रक्षा के उद्देश्य से स्थापित की गई थी।
अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि होली के अवसर पर प्लास्टिक या रासायनिक पदार्थों की जगह पारंपरिक उपलों और प्राकृतिक सामग्री का ही उपयोग करें, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे और त्योहार की पवित्रता अक्षुण्ण रहे।
रिपोर्ट गिरीश त्रिपाठी



















