
समंदर में भटक रहे रूसी तेल जहाज, चीन ने किया इनकार अब भारत क्या करेगा?

नई दिल्ली।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों का असर अब खुले समंदर में साफ दिखाई देने लगा है। रूस के कच्चे तेल से भरे एक दर्जन से अधिक टैंकर महीनों से बिना खरीदार के समुद्र में भटक रहे हैं। चीन ने ऐसे जहाजों को अपने बंदरगाहों में प्रवेश देने से इनकार कर दिया है, जबकि भारत ने भी रूसी तेल की खरीद में कटौती की है। ऐसे में सवाल उठता है कि रूस अपने अतिरिक्त तेल का क्या करेगा और भारत की आगे की रणनीति क्या होगी।
भारत ने रोकी खरीद या सिर्फ घटाई?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता संभव हुआ। हालांकि, यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद नहीं की है, लेकिन इसमें कमी जरूर आई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में भारत ने रूस से औसतन 12 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, जबकि 2024 के मध्य में यह आंकड़ा 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था।
समुद्र में भटकते टैंकर
ग्लोबल शिपिंग-इंटेलिजेंस फर्म केपलर के अनुसार, कम से कम 12 रूसी तेल टैंकर हिंद महासागर, मलेशिया, चीन और पूर्वी रूस के तटों के पास बिना किसी तय गंतव्य के घूम रहे हैं। इन जहाजों में रूस के प्रमुख कच्चे तेल ग्रेड यूराल्स के लगभग 1.2 करोड़ बैरल भरे हुए हैं।
चीन क्यों कर रहा है इनकार?
हालांकि चीन की कुछ स्वतंत्र रिफाइनरियों ने जनवरी में यूराल्स तेल की खरीद बढ़ाई है, लेकिन चीन अब भी कई रूसी टैंकरों को अपने बंदरगाहों में प्रवेश की अनुमति नहीं दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय निगरानी, बीमा संबंधी जोखिम और प्रतिबंधों का डर इसके पीछे बड़ी वजह मानी जा रही है।
लावारिस जहाज और मानवीय संकट
रूस से चीन के लिए रवाना हुआ एक टैंकर महीनों से अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में फंसा हुआ है। जहाज पर मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, क्रू को लंबे समय तक वेतन नहीं मिला, भोजन और जरूरी सामान की भारी कमी हो गई थी।
दिसंबर में इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) ने इस जहाज को परित्यक्त (Abandoned) घोषित किया और बाद में हस्तक्षेप कर क्रू के बकाया वेतन और जरूरी आपूर्ति की व्यवस्था कराई।
भारत की बदली रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि भारत अब तेल आयात को लेकर डायवर्सिफिकेशन नीति अपना रहा है। भारत सरकार ने रूसी तेल पर कोई आधिकारिक रोक नहीं लगाई है, लेकिन कुछ भारतीय रिफाइनरियां नए ऑर्डर टाल रही हैं।
भारत अब अमेरिका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका जैसे विकल्पों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके।
आगे क्या?
वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति फिलहाल ज्यादा है, जिससे रूस के लिए नए खरीदार ढूंढना और मुश्किल हो गया है। समुद्र में भटकते रूसी टैंकर आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीति की बड़ी कहानी बन सकते हैं।
रिपोर्ट: RPS समाचार



















