
डॉ. शशांक शेखर शुक्ल ने कटरी के 15 बाढ़ प्रभावित गांवों में 200 से अधिक परिवारों तक पहुंचाई राशन सामग्री

बांगरमऊ, उन्नाव। बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र के गंगा कटरी इलाके में बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए डॉ. शशांक शेखर शुक्ल ने 15 गांवों के 200 से अधिक परिवारों तक राशन सामग्री पहुंचाई। डॉ. शुक्ल स्वयं बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचे और ग्रामीणों के बीच राशन सामग्री वितरित करने के साथ उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उनकी पत्नी सुश्री पूजा मिश्रा भी उनके साथ रहीं और राशन वितरण में सहयोग किया।
डॉ. शुक्ल ने तीन दिन पूर्व भी बाढ़ प्रभावित कटरी क्षेत्र का दौरा किया था। उस दौरान गांवों में जलभराव, फसलों को हुए नुकसान, बाधित आवागमन और परिवारों की कठिन परिस्थितियों को करीब से देखने के बाद उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से बात कर प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया था। ग्रामीण परिवारों की स्थिति से व्यथित होकर डॉ. शुक्ल ने स्वयं राशन सामग्री की व्यवस्था कर उसे प्रभावित परिवारों तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
राशन सामग्री सायपुर सगौड़ा, अलोलापुर, छत्रपुरवा, बगिया, मितानपुरवा, गड़ेवा, रतई पुरवा, फरीदपुर कट्टर, कुशलपुरवा और मल्लाहन पुरवा सहित कटरी क्षेत्र के कुल 15 बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचाई गई।
प्रत्येक परिवार को दिए गए राशन पैकेट में 5 किलो आटा, 5 किलो चावल, 1 किलो दाल, 1 किलो चीनी, 500 मिलीलीटर सरसों का तेल, 1 किलो नमक, 2 किलो आलू, चाय पत्ती, हल्दी, मिर्च और गरम मसाला सहित आवश्यक खाद्य सामग्री रखी गई थी।
डॉ. शुक्ल ने कहा कि कटरी के लोगों के लिए बाढ़ कोई एक बार आने वाली आपदा नहीं है। गंगा में जलस्तर बढ़ने पर लगभग हर वर्ष गांवों, खेतों और संपर्क मार्गों पर इसका प्रभाव पड़ता है। इससे फसलों और आजीविका के नुकसान के साथ ग्रामीणों का आवागमन भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा, “तीन दिन पहले जब मैं इन गांवों में आया था तो परिवारों की स्थिति देखकर लगा कि केवल उनकी समस्या सुनकर वापस लौटना पर्याप्त नहीं है। मैंने प्रशासन से तत्काल राहत के लिए बात की और आज अपनी ओर से राशन सामग्री लेकर इन परिवारों के बीच आया हूं। लेकिन कटरी के लोगों को हर साल केवल राहत की नहीं, इस समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत है।”
डॉ. शुक्ल ने कहा कि कटरी क्षेत्र की बाढ़ और कनेक्टिविटी की समस्या को एक साथ हल करने के लिए चार लेन की ऊंची सड़क-सह-तटबंध (फोर लेन रोड-कम-एम्बैंकमेंट) विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि ऐसी सड़क का निर्माण किया जाए जो एक ओर बाढ़ के पानी और कटान से गांवों को सुरक्षा देने में सहायक हो और दूसरी ओर कटरी क्षेत्र को कानपुर तथा गंगा एक्सप्रेसवे से मजबूत और स्थायी सड़क संपर्क प्रदान करे।
उन्होंने कालीमिट्टी-दबौली-शिवराजपुर संपर्क मार्ग की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि बाढ़ और कटान के कारण इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन बार-बार बाधित होता है। यह मार्ग कटरी के गांवों को शिवराजपुर के रास्ते कानपुर की ओर जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके कटने से ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
डॉ. शुक्ल ने कहा, “हर साल बाढ़ आए, सड़क कटे और फिर अस्थायी मरम्मत करके अगले साल उसी समस्या का इंतजार किया जाए—यह समाधान नहीं है। हमें ऐसी स्थायी आधारभूत संरचना बनानी होगी जो कटरी को बाढ़ से सुरक्षा भी दे और उसे कानपुर तथा गंगा एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी भी प्रदान करे।”
इसके साथ ही उन्होंने कल्याणी नदी की व्यापक सफाई, पुनरुद्धार, खोदाई एवं आवश्यक ड्रेजिंग की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि नदी की जल निकासी क्षमता बढ़ाना आवश्यक है, ताकि अतिरिक्त बरसाती और बाढ़ का पानी आसपास के गांवों और खेतों में फैलने के बजाय प्राकृतिक जलधारा के माध्यम से आगे निकल सके।
डॉ. शुक्ल ने ग्रामीणों से कहा कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर श्री अखिलेश यादव जी के नेतृत्व वाली सरकार के समक्ष कटरी क्षेत्र की बाढ़ और कनेक्टिविटी से जुड़ी इन समस्याओं को प्राथमिकता से रखकर इनके दीर्घकालिक समाधान के लिए कार्य कराने का प्रयास किया जाएगा।
इस राहत अभियान के प्रमुख आयोजकों में युवा समाजवादी नेत्री यशोदा निषाद, समाजवादी पार्टी के सेक्टर प्रभारी डॉ. मूलचंद्र तथा कुलदीप निषाद शामिल रहे। तीनों ने प्रभावित गांवों में अभियान के आयोजन, जरूरतमंद परिवारों की पहचान तथा गांव-गांव जाकर राशन वितरण को सुचारु रूप से संपन्न कराने में प्रमुख भूमिका निभाई। स्थानीय साथियों और ग्रामीणों ने भी अभियान में सहयोग किया।
डॉ. शुक्ल ने सभी आयोजकों, सहयोगियों और स्थानीय ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कटरी के लोगों के साथ उनका जुड़ाव केवल बाढ़ के समय राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा। बाढ़, कटान, आवागमन और आजीविका से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए वह लगातार प्रयास करते रहेंगे।



















