आपके हाथ में यदि इस तरह की बनती है लकीरे तो बेहद भाग्यशाली हैं आप

Listen to this article
Palmistry: अगर आपके हाथ में भी बनती है ये लकीर तो बेहद भाग्यशाली हैं आप

आपके हाथ में यदि इस तरह की बनती है लकीरे तो बेहद भाग्यशाली हैं आप

 

ज्यो0 रघुनाथ प्रसाद शास्त्री

हस्‍तरेखा सामुद्रिक शास्‍त्र का एक प्रमुख भाग माना जाता है। अपनी ज़िन्दगी में कोई भी इंसान जैसा काम करता है उसके हिसाब से उसके हाथ की रेखाएं बनती और बिगड़ती रहती हैं।  इसी वजह से कहा जाता है कि हाथों की रेखाओं का फल कभी भी स्थाई नहीं होता है। हस्तरेखा के जानकार बताते हैं कि हाथों की कुछ रेखाएं अच्छी बातों की तरफ इशारा करती हैं तो वहीं कुछ रेखाएं अगर आपके हाथ में हैं तो ये चिंता का विषय भी बन सकती है। ऐसी ही एक रेखा के बारे में हम आपको आज बताने जा रहे हैं जो अगर आपके भी हाथ में तो ये आपके लिए बेहद ही अच्छी खबर है।  

हाथों की लकीरों में बने ‘Y’ का अर्थ जानते हैं आप?

हाथों की लकीरों को गौर से देखने पर आपको भी समझ आता है कि ये लकीरें वास्तव में अलग-अलग तरह की आकृतियां बनाती हैं। इन्हीं में से एक रेखा है जिसकी आकृति वाई (Y) आकार में बनती है। अब यहाँ ये भी जानना ज़रूरी है कि हाथ में बन रहा ये वाई चिन्ह दोनों शुभ और अशुभ बातों की तरफ इशारा करता है। आपकी जीवन रेखा से कोई रेखा निकलकर अगर चन्द्र पर्वत की ओर जाते हुए अगर यह लकीर उल्टी वाई बनाती है तो यह रेखा दिखने में बेहद सामान्य होती है, लेकिन व्यक्ति के जीवन में इसका बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।

किसी भी इंसान की हथेली में इस तरह की दो रेखाएं होती है। एक रेखा तो वो होती है जो कि शुभ बातों का संकेत देने वाली होती है और दूसरी रेखा अशुभ बातों की तरफ इशारा करती है। अगर यह रेखा जीवन रेखा से होकर चंद्र पर्वत पर जाकर रुक जाए तो ऐसी स्थिति में बना वाई का निशान किसी भी इंसान के लिए बेहद शुभ और फलदायक माना जाता है। ऐसे वाई के निशान जिस जातक की हथेली में होता है वो विदेश यात्रा करते हैं। आमतौर पर ऐसी रेखा वाले लोग अपना खुद का व्यवसाय करते हैं जिसकी शाखा विदेशों तक में होती हैं। ऐसे लोग आर्थिक रूप से संपन्न होते हैं और खुशहाल जीवन जीते हैं।

हालाँकि अगर किसी इंसान की हथेली की रेखा यदि जीवनरेखा से निकलते हुए साधारण वाई का निशान बनाती है तो इसे अशुभ माना जाता है।  इस रेखा का मतलब जीवन, जीवनशक्ति को काम करने वाली होता है। ऐसा माना जाता है कि जिस भी उम्र में यह रेखा जीवन रेखा को काटती है उसी समय/उम्र से इंसान की जीवन शक्ति कमज़ोर होने लग जाती है।  

जीवन शक्ति कमज़ोर होने का मतलब होता है कि इंसान शारीरिक रूप से बीमार होने लग जाए या ऐसा भी हो सकता है कि उस इंसान की ज़िंदगी में इतनी अधिक परेशानियां बढ़ जाएं कि उसका जीवन से मोह ही हटने लग जाए और ऐसी स्थिति में वो मानसिक और शारीरिक रूप से असक्ष्म होने लगे। इसके साथ ही ऐसे लोगों को पक्षाघात होने की भी संभावना बढ़ जाती है।

विज्ञापन बॉक्स