चंद्र एवं सूर्य राशि मे भेद

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चंद्र एवं सूर्य राशि मे भेद

बहुत से लोग ये सवाल उठाते हैं कि – एक ही राशि दुनियाँ भर के विभिन्न लोगों पर कैसे सटीक बैठेगी ?
अलग-अलग काम-धंधा करने वाले लोगों पर एक ही फल-कथन कैसे सही होगा ?
बारह राशियों में सारी दुनीयाँ को कैसे समेटा जा सकता है ?

उदाहरण के लिये
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पहले भूमि के एक क्षेत्र की बात करें, जहाँ विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे हैं। उन सब पर सामान जल-वायु और उपजाऊ शक्ति काम करेगी। पेड़ छोटा हो यां बड़ा सबको समान उपजाऊ शक्ति मिलेगी । प्रकृति का नियम है।
ये अलग बात होगी कि – कौनसा पौधा और कौनसा पेड़ कितनी जल-वायु और उपजाऊ शक्ति का इस्तेमाल करता है । क्योंकि उनकी जरूरत उनकी आवश्यकता अनुसार होगी । जोकि भूमि में समाई उनकी जड़ों और उनकी लंबाई-चौड़ाई पर निर्भर करेगा । लेकिन इन सबके लिये जल-वायु और उपजाऊ शक्ति एक जैसी ही होगी ।
यही चंद्र-राशि का कमाल है । जब हम किसी एक राशि की बात करते है तो हम जैसे पृथ्वी के किसी एक क्षेत्र की बात करते हैं ।
उसका राशि स्वामी, उसके नक्षत्र, उसका तत्त्व और उसके मित्र-शत्रु ग्रह तथा उसका स्वभाव इत्यादि ।
इसी तरह आप बारह राशियों को संपूर्ण पृथ्वी के बारह क्षेत्र समझ सकते हैं । इन बारह क्षेत्रों की अलग-अलग जल-वायु और उपजाऊ शक्ति है । जैसे बारह राशियों का अलग-अलग स्वभाव है । इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग अलग-अलग किस्म के अलग-अलग पेड़-पौधे हैं । लेकिन इन सबको एक जैसी ही जल-वायु और उपजाऊ शक्ति प्रभावित करती है । जैसे किसी एक राशि को चंद्र अपने संचार से प्रभावित करता है ।
मान लीजिये कि – तुला-राशि नाम का एक पृथ्वी का क्षेत्र है । जहाँ राम, नाम का एक फलदार पेड़ है और वहीँ रावण नाम का एक कांटेदार पेड़ भी है । फलदार और कांटेदार इसलिये, क्योंकि जन्म के ग्रह योग लोगों को ऐसा बना देते हैं ।
अब जब हम उस क्षेत्र की जलवायु और उपजाऊ शक्ति का विश्लेषण करेंगे तो दोनों पेड़ों का सामान विश्लेषण होगा । लेकिन उस सामान जलवायु और उपजाऊ शक्ति से राम अपने फलों को बढ़ायेगा और रावण अपने काँटों को बढ़ायेगा ।
इसी तरह जब हम एक राशि का फल-कथन चन्द्रमा से करते हैं तो उस राशि के सभी लोगों का सामान विश्लेषण होगा । क्योंकि चंद्र अपना प्रभाव सभी पर सामान रूप से डालेगा । लेकिन उनके लग्न अनुसार उनका स्वभाव होगा और सूर्य अनुसार उनकी जड़ें होगी । चंद्र के प्रभाव से वे उन्ही दोनों को बढ़ायेंगे ।
क्योंकि जन्म लग्न – जीवन रूपी पेड़ है, सूर्य इस पेड़ का मूल है अथवा जड़ है और चंद्रमा इस पेड़ की जलवायु है उपजाऊ शक्ति है ।
लग्न और सूर्य मिलकर पेड़ का निर्माण करते हैं और चन्द्रमा उन्हें अपनी उपजाऊ शक्ति से सिंचता है। जैसे किसी भी क्षेत्र में पेड़ अपनी जड़ों और तने को लेकर खड़ा रहता है । जीवनभर उसे जलवायु और उपजाऊ शक्ति ही सिंचती रहती है।
चंद्र का बल ही जीवन रूपी पेड़ की उपजाऊ शक्ति है । तभी जन्म-कुंडली के साथ चंद्र-कुंडली भी बनायीं जाती है । जितना चंद्र बलवान होगा उतना ही व्यक्ति दुनियादारी में दक्ष होगा और द्रव्य अर्जन में माहिर होगा । जैसे चन्द्रमा अगर लग्न में हो तो व्यक्ति दुनियादारी में बहुत दक्ष होता है और धन-अर्जन के उसके एक से अधिक स्त्रोत होते हैं । यहाँ चंद्र अपनी भरपूर उपजाऊ शक्ति से जीवन रुपी पेड़ को पूर्ण रूप से हरा-भरा रखता है ।
जब आप अपनी राशि देखते हैं तो आप ये देखते हैं कि – आज चंद्र का संचार आपके जीवन रूपी पेड़ की उपजाऊ शक्ति में बढ़ोतरी करेगा यां नहीं करेगा । जिससे आप दुनियादारी में सफल हो सके और द्रव्य-अर्जन कर सके ।

सन-साईन और हमारी राशि
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पहली बात तो ये कि – सूर्य एक माह तक जिस राशि में रहेगा – उस दौरान जन्म लेने वाले सभी जातकों का सन-साईन एक ही होगा । ये बड़ा स्थूल विश्लेषण हो जायेगा । इसमें सूक्ष्मता से स्वभाव को समझना आसान नहीं होगा ।
जबकि – 54 घंटे के दौरान चंद्र जिस राशि में होगा उस दौरान जन्म लेने वाले जातकों की राशि हमारी राशि होगी । अर्थात चंद्र-राशि । इसमें सूक्ष्मता से स्वभाव को समझना सहज हो जाता है । क्योंकि हम इसे आगे नक्षत्रों में बाँट देते हैं । उन नक्षत्रों को भी चरणों में बाँट देते है । तब जाकर जन्म लेने वाले बच्चे का नामकरण हो पाता है ।
इनका अंतर और गहराई से समझते हैं ।
जीवन एक पेड़ की तरह है । ज्योतिष की भाषा में इसे आप ‘लग्न’ कह लिजिये ।
राशि इसकी शैली है अर्थात जीवन रूपी पेड़ किस तरह बढ़ेगा – राशि उस शैली को दर्शाती है ।
राशि इस पेड़ का निखार है अर्थात दुनियादारी है । आप चंद्र की घटबढ़ से दुनियां को समझते हैं ।
लेकिन – सन-साईन सूर्य-राशि है जो मूल तत्वों का पता देती है । ये जीवन रूपी पेड़ की जड़ो के विषय में बताती है । क्योंकि सूर्य – मूल तत्व है, जड़ है । जड़ों की गहराई में जाकर आप पता लगाते हैं कि – पेड़ कितना बलवान है । पेड़ की बलवता हो चुकी अर्थात पेड़ अपनी मज़बूती के साथ खड़ा हो गया । अब प्रतिदिन तो पेड़ की जड़ों की गहराई में जाकर उसकी मापतौल नहीं होगी । लेकिन पेड़ की हरियाली की प्रतिदिन मापतौल करनी होगी ।
जीवनशैली तय होते-होते होगी और इसमें घटबढ़ भी हो सकती है । जीवन रूपी पेड़ तो स्थापित हो चूका अपने मूल-तत्वों, अपनी जड़ों पर और अब उसका केवल निरिक्षण किया जा सकता है ।
लेकिन पेड़ के निखार पर नज़र रखनी होगी अर्थात राशि समझनी होगी । दुनियादारी को समझना होगा । ये तो चंद्र-राशि से ही पता चलेगा । क्योंकि निखार में घटबढ़, जीवनशैली में घटबढ़ और दुनियादारी में घटबढ़ मन को विचलित कर देती है। क्योंकि मन का स्वामी चंद्र है और घटबढ़ का स्वामी चंद्र ही है।
चंद्र राशि फलादेश से एक मोटा अनुमान तो लगाया जा सकता है कि आपका दिन अनुकूलता की ओर है या प्रतिकूलता की ओर, लेकिन सटीक फलादेश तो आपकी कुण्‍डली के पूर्ण विश्‍लेषण से ही बताया जा सकता है।
यह रचना मेरी नहीं है मगर मुझे अच्छी लगी तो आपके साथ शेयर करने का मन हुआ।🙏🏻
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