पाक महीना रमजान पर गिरीश त्रिपाठी की खास रिपोर्ट

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पाक महीना रमजान पर गिरीश त्रिपाठी की खास रिपोर्ट

शुक्रवार को चाँद दिख गया है अब आज शनिवार से शुरू से हो जाएगा रमजान का महीना

ज्ञातव्य है कि इस्लाम धर्म के सबसे पाक महीनों में शुमार रमजान का महीना आज शनिवार से शुरू है।

रिपोर्ट-गिरीश त्रिपाठी स्वतंत्र पत्रकार

उन्नाव
रमजान के पूरे महीने तक मुस्लिम समुदाय के लोग रोजे रखते हैं,कुरान पढ़ते हैं।
हर दिन की नमाज के अलावा रमजान में रात के वक्त एक विशेष नमाज भी पढ़ी जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं।

लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग साल भर रमजान का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि ऐसी मान्यताएं हैं कि इस महीने अल्लाह अपने बंदों को बेशुमार रहमतों से नवाजता है और दोजख (जहान्नम) के दरवाजे बंद कर के जन्नत (स्वर्ग) के दरवाजे खोल देता है।

रमजान के महीने में रोजे रखना 7 साल की उम्र के बाद से हर सेहतमंद मुसलमान पर फर्ज है। माना जाता है कि रमजान के महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर जायज दुआ को कुबूल करता है और उनको गुनाहों से बरी करता है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए रमजान का महीना इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस महीने की गई इबादत का सवाब बाकी महीनों के मुकाबले 70 गुना मिलता है।

रमजान में रोजा नमाज के साथ कुरान पढ़ने की भी काफी फजीलत है, क्योंकि रमजान के महीने में 21वें रोजे को ही पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब पर ही अल्लाह ने ‘कुरान शरीफ’ नाजिल किया था. यानी कुरान अस्तित्व में आया था।

रमजान के महीने का चांद दिखने के बाद से ही तरावीह (एक तरह की नमाज) पढ़ने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
इसी रात सूरज निकलने से पहले सुबह के समय सहरी खाकर मुस्लिम समुदाय के लोग रमजान का पहला रोजा रखकर अपनी इबादतों का सिलसिला शुरू कर देते हैं।

सहरी और इफ्तार क्या है?
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रमजान के महीने में सहरी और इफ्तार करने की भी बेहद फजीलत(प्रधानता) है। सहरी सुबह सूरज निकलने से पहले खाए गए खाने को कहते हैं. सहरी खाकर ही रोजा रखा जाता है।

कहा जाता है कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने सहरी करने को सुन्नत बताया है। कहते हैं कि सहरी करने से बरकत होती है. इसलिए सहरी करने से सवाब मिलता है।

शाम में सूरज ढलने पर जब रोजा खोलते हैं उसे इफ्तार कहते हैं।कहते हैं इफ्तार के समय रोजेदार दिल से जो दुआ मागंते हैं, अल्लाह उनकी तमाम जायज दुआएं कुुबूल करता है।
रोजा रखने के बाद रोजेदार ना गलत बात कर सकता है और ना झूठ बोल सकता है और ना ही किसी की बुराई कर सकता है।
इसी तरह गलत चीजों को देखने और सुनने से भी रोजा टूट जाता है. इसलिए कहा जाता है कि रोजा रखने पर इंसान हर गलत काम और बुराइयों से पाक हो जाता है।

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