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कर्मचारी जर्जर आवाज में रहने को मजबूर

 

फतेहपुर चौरासी उन्नाव 

विकासखंड परिसर में ब्लाक के कर्मचारियों के

आवास पूरी तरह जर्जर व जीर्णशीर्ण हो गए हैं। दीवारों में दरारें आ गई हैं। छत से प्लास्टर गिर रहा है। कई आवास तो गिरने के कगार पर हैं। इससे ब्लाक के अधिकारियों व कर्मचारियों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। विकासखंड फतेहपुर चौरासी की स्थापना करीब 1958 में हुई थी। यहां पर बीडीओ, एडीओ, बाबू व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिलाकर करीब एक दर्जन से अधिक आवासों का निर्माण ब्लाक के भवन के साथ कराया गया था। ब्लाक परिसर में – बने आवासों में ही रहकर कर्मचारी – दिनभर काम करते थे। आवासों की समय-समय पर मरम्मत न हो पाने के कारण कुछ ही वर्ष बाद जर्जर हो न गए। साथ ही इन सभी जर्जर तो कंडम घोषित कर गया।

इन सभी आवासीय भवनों की छतों व दीवारों से प्लास्टर टूट-टूट कर नीचे गिर रहा है। वहीं फर्श भी ध्वस्त है। बारिश के दिनों में छतों से पानी टपकता है। जिसका परिणाम यह है कि सभी आवास रहने के लायक नहीं रह गए हैं। ऐसी स्थिति में ब्लाक में कार्यरत वीडियो और अन्य कर्मचारीयों को आवास के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। 69 ग्राम पंचायत वाले इस ब्लाक में तैनात अधिकारी व कर्मचारी किराए के कमरे में रहकर ड्यूटी कर रहे हैं। कर्मचारियों ने बताया कि अधिकारियों से आवास निर्माण की मांग की जा रहीं है। ब्लाक प्रमुख मनोज निषाद व बीडीओ ने बताया कि जो आवास मरम्मत के लायक हैं, उनकों सुधरवाया जाए। जो बिलकुल ही अप्रयोज्य हो गए हैं, उनकी जगह नए भवन बनाए जाने की कवायद शुरू की जाएगी।

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