बजट 2020: मोदी सरकार के पास पैसों की भारी कमी…

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बजट 2020: मोदी सरकार के पास पैसों की भारी कमी…

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लखनऊ

बजट 2020: मोदी सरकार के पास पैसों की भारी कमी…

RBI के सामने फैलाए हाथ…

नई दिल्ली: आम बजट में अब हफ़्ते भर का समय रह गया है, लेकिन राजस्व वसूली के मोर्चे पर पिछड़ी सरकार के सामने मुश्किलों का अंत नज़र नहीं आ रहा है. क़िल्लत से जूझ रही सरकार ने अब रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से 10 हज़ार करोड़ रुपए के अंतरिम लाभांश की मांग की है.

राजस्व वसूली के लक्ष्य से काफी पीछे रह जाने के बाद केंद्र सरकार ने आरबीआई से गुहार लगाई है कि वो 10 हज़ार करोड़ रुपए की मदद करे. राजस्व वसूली के गैप को ही भरने के लिए सरकार आरबीआई से अंतरिम लाभांश की मांग कर रही है.

आपको बता दें कि ये लगातार तीसरा साल है जब सरकार ने बजट से पहले आरबीआई के आगे हाथ फैलाए हों. माना जा रहा है कि राजस्व वसूली के तय लक्ष्य से पीछे रहने की वजह टैक्स में कमी और विनिवेश से होने वाली प्राप्तियों में आयी कमी है. सरकार 1 फरवरी, 2020 को बजट पेश करने वाली है. सरकार को इस बार जीएसटी कलेक्शन में तय लक्ष्य से काफी कम फंड मिल पाए.

हालांकि सरकार द्वारा अंतरिम लाभांश की मांग पर आरबीआई ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं किया है. माना जा रहा है कि 15 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाली आरबीआई के केन्द्रीय बोर्ड की बैठक में सरकार की मांग पर कोई फैसला हो सकता है. संभावना इस बात की है कि आरबीआई सरकार की मांग को मंजूरी दे देगी.

आरबीआई ने पिछले साल अपनी बैलेंस शीट के छमाही ऑडिट की व्यवस्था की थी, ताकि सरकार को कितना अंतरिम लाभांश दिया जाए और इसे लेकर फैसला हो सके. आरबीआई द्वारा सरकार को अंतरिम लाभांश देने की व्यवस्था साल 2016-17 में शुरू की गई थी. तब भी आरबीआई ने सरकार को 10 हजार करोड़ रुपए का लाभांश दिया था.

इसके बाद बीते साल आरबीआई ने सरकार को 28 हजार करोड़ रुपए का लाभांश देने का फैसला किया था. बता दें कि आरबीआई अपना लाभ मुख्य तौर पर करेंसी की ट्रेडिंग और सरकारी बॉन्ड्स की मदद से प्राप्त करता है. इस लाभ में से आरबीआई द्वारा अपने ऑपरेशनल और आकस्मिक जरूरत लायक लाभ को अपने पास रखकर बाकी फंड सरकार को ट्रांसफर कर दिया जाता है.

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